अवसाद (डिप्रेशन) से मुक्ति पाने के 12 कारगर तरीके
आजकल डिप्रेशन का शिकार होने की तादाद बहुत बढ़ गयी है। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अवसाद ग्रस्त लोंगों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में कभी-कभी एंटीडिप्रेसेंट दवाएं भी लोग लेते हैं। पर इसका उपयोग बहुत दिनों तक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। इन दवाओं से बच्चों का इलाज नहीं किया जाना चाहिए। किशोऱों में भी ये आखिरी विकल्प होना चाहिए। आइए हम बात करते हैं ऐसे 12 कारगर तरीकों की जो आपको डिप्रेशन से मुक्ति देने में मदद करते हैं।
1 रफ्तार घटाएं :
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अवसाद दिनचर्या का बाइप्रोडक्ट बन गया है। अगर आपको लग रहा है कि दिनचर्या का भार आपको परेशान कर रहा है तो अपनी रफ्तार घटाएं। खुद को समय दें। भावनात्मक तूफानों के दौरान अपने विचारों और भावनाओं को पर पूरा ध्यान दें। अपनी जिंदगी की रफ्तार को थोड़ा धीमा करें, खुद पर ध्यान दें। ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। अपने आस-पास की दुनिया के साथ फिर से जुड़ने और उस पर ध्यान देने के लिए समय दें। दुनिया के साथ ही अपने शरीर से जुड़ें।
2 अपनी भावनाओं को समझें :
जिस उलझन,कठिन विचार या भावना ने आपको जकड़ लिया है उस पर ध्यान दें। इस भावना को महसूस करें कि जिसकी वजह से आप विचलित हैं और उसे जिज्ञासा के साथ नोटिस करें। फिर इस भावना, विचार या उलझन को नाम दें। उदाहरण के लिए 'मैं अमुक उलझन से परेशान हूं' या फिर 'यहाँ मेरे सीने में जकड़न है' या फिर 'मुझे इस स्थिति में गुस्सा आता है' हो सकता है आप ये लिखें कि 'मै अपने इस अतीत से भागना चाहता हूं। या फिर आप लिखें 'मैं अपने भविष्य के इस हिस्से को लेकर आशंकित हूं” अब वर्तमान में आप जो कर रहे हैं उस पर पूरा ध्यान दें। आप अपने लिखे या ध्यान दिए हुए विचार, उलझनों को लेकर वर्तमान के आपके काम कैसे मदद कर सकते हैं। इस बात को फिर से देखें और उस पर पूरा ध्यान दें। इससे आपको अवसाद की जगह समाधान दिखने लगेगा।
3 मूल्यों का मूल्य समझें :
अवसाद की स्थिति में आप अपने उन मूल्यों को जीवन में सबसे ज्यादा प्रमुखता दें जो आपके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उन मूल्यों को चुनें जो आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण के लिए दया, मदद की भावना, बहादुरी, मेहनतकश बनना ऐसे तमाम मूल्य है जिनमें आपको तय करना है कि आपके लिए कौन से मूल्य सबसे महत्वपूर्ण हैं! फिर एक छोटा सा तरीका चुनें जिससे आप अगले सप्ताह इन मूल्यों के अनुसार कार्य कर सकें। ये काम छोटे-छोटे हो सकते हैं, बहुत सामान्य हों सकते हैं। आप अपने जीवन मूल्यों की तरफ जितनी तेजी से जाएंगे अवसाद आपसे दूर होता रहेगा।
4 दयालु बनें :
आप किसी भी मूल्य के हामी हों लेकिन जो मूल्य आपके जीवन में हमेशा मदद करता है वो है दूसरों के प्रति दया करना। इस लिए दयालु। आप दूसरों के दर्द को नोटिस करें और उसके प्रति सहानुभूति, दया और सहयोग का भाव रखें। दूसरों के दर्द को नोटिस करने की कोशिश करें। इस प्रयास में आपका परिचय अपने दर्द से हो जाएगा। आप खुद से बात करने का प्रयास करें। यदि आप स्वयं के प्रति दयालु हैं तो आपके पास दूसरों की सहायता करने के लिए अधिक ऊर्जा होगी। यदि आप दूसरों के प्रति दयालु होंगे तो आपको अधिक प्रेरणा और सकारात्मक शक्ति मिलेगी। ये एक ऐसा चक्र है जो आपको अवसाद से दूर रखता है।
5 विशेषज्ञ की सहायता लें :
एक प्रशिक्षित थेरेपिस्ट, परामर्शदाता या मनोचिकित्सक के साथ टॉक थेरेपी, व्यायाम और सहायता समूह उपलब्ध विकल्पों में से हैं। कई बार आप जिस समस्या को लेकर उलझे रहते हैं विशेषज्ञ उसका हल आराम से बता देते हैं। थेरेपिस्ट के पास जाने में ना शर्म करनी चाहिए ना देर। किसी भी रोग की तरह अवसाद को लंबे समय तक बिना इलाज के पाल कर रखने पर नुकसान हो सकता है।
6 अपने अवसाद के बारे में बात करें :
आपके पार्टनर, परिवार और दोस्तों के लिए भी आपके डिप्रेशन से निपटना काफी मुश्किल हो सकता है। डिप्रेशन सिर्फ आपको ही नहीं है, यह आपके आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करेगा। बहुत से लोगों इस बारे में पूछने से हिचिकिचाते हैं। हो सकता है आपके अवसाद के बारे में पूछना उन्हें मुश्किल लग सकता है। इससे आपके लिए अपनी भावनाओं को साझा करना और भी मुश्किल हो सकता है। आप उन पर खुदको अकेले छोड़ देने का दोष ना दें। बल्कि उनसे अपनी भावनाएं साझा करें। यह इंगित करने का प्रयास करें कि वे आपकी कैसे मदद कर सकते हैं, ताकि वे जान सकें कि वे आपके लिए क्या कर सकते हैं।
7 अवसाद होना कोई शर्म की बात नहीं :
अवसाद होना बिलकुल भी शर्म की बात नहीं है। यदि आपको लगता है कि इस बारे में कैसे बात की जाय तो आपको जानना जरुरी है कि अवसाद किसी को भी हो सकता है। अवसाद की समस्या चिंता और आत्मसम्मान की कमी से जुड़ी हो सकती है। इस भावना के साथ कि आप कभी भी कुछ भी सही नहीं करते हैं। आप कहीं वैकेशन पर अपने दोस्तों के साथ हैं या फिर अपना फेवरिट काम कर रहे हैं तो भी अवसाद होने पर आपको महसूस हो सकता है कि आप इस पल का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। या आपके साथ लोग एनजॉय नहीं कर रहे हैं। यदि आप इन भावनाओं को बाहर नहीं लाते हैं, तो ये भावनाएँ आपको अंदर से खा जाएंगी। शर्म अवसाद के लिए खाद पानी का काम करती है।
8 नींद लें, दिनचर्या सुधारें :
किसी भी काम को ठीक करने से पहले शरीर में उर्जा की बहुत जरुरत होती है। ऐसे मे अगर आपको जरुरत के मुताबिक नींद नहीं मिल रही है तो ये अवसाद का रूप भी ले सकती है। सबसे पहले अवसाद को मिटाने के लिए कम से कम आठ घंटे की नींद लें। नींद पूरी होगी तो दिमाग में स्फूर्ति होगी और आपको पूरे दिन तरोताजा महसूस होता रहेगा। इस स्थिति मे आपको नकारात्मक भाव मन में कम आएंगे।
अवसाद से निपटने के लिए अपनी दिनचर्चा में सुधार बहुत जरुरी है। इसके लिए हर दिन आपको सूरज की रोशनी में कुछ देर जरूर रहना चाहिए। आजकल लेट नाइट तक काम और देर में उठने ही कारपोरेट जीवन की कहानी हो गयी है। लेकिन अगर आप थोड़ी देर सूरज में रहेंगे तो अवसाद खत्म करने में आसानी होगी। इसके अलावा रोज बाहर टहलें, कभी-कभी कॉफी शॉप में कुछ समय बिताएं या बाहर खाना खाने जाएं। सिर्फ काम में फंसे रहने से जीवन में एकरूपता आती है और मन का उत्साह खत्म हो जाता है जो बाद में अवसाद का रुप ले लेता है।
9 अपने कामकाज का हिसाब रखें :
अपने फाइनेंस की तरह अपने वर्किंग का भी पूरा हिसाब रखें। आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि दिन भर में किस गतिविधि को कितनी देर तक करते हैं। आप दिन में कितना और कैसा काम कर रहे हैं। आप जब रिकार्ड बनाने लग जाएंगे तो इससे आपको अपने काम और जीवन की बाकी गतिविधियों के बीच संतुलन बनान में बहुत आसान लगेगा। इससे आपको ये भी पता चलेगा कि आपका समय कहां पर व्यर्थ जा रहा है। इससे आपको समय प्रबंधन में आसानी होगी और आपका तनाव भी कम होगा।
10 ध्यान व योग को दिनचर्या में शामिल करें :
किसी भी इंसान की भावनाओं को उसकी मानसिक स्थिति को उसकी शारीरिक मुद्रा से अलग नहीं किया जा सकता है। अगर शारीरिक मुद्रा में सुधार होता है तो व्यक्ति के भावनात्मक स्थिति में भी बदलाव आता है। यहीं पर योग डिप्रेशन ग्रस्त व्यक्ति की मदद कर सकता है। विभिन्न आसनों में सबसे अच्छा असर असर उर्ध्व धनुरासन और विपरीत दंडासन हैं। यह मुद्रा एक तरह से डिप्रेशन का प्रतिकार करती है। इसमें कंधे को पीछे ले जाया जाता है, जिससे छाती खुलती है।खड़ी मुद्रा वाले आसन जैसे त्रिकोणासन,
पार्श्वकोणासन और अर्धचन्द्रासन भी प्रभावी होते हैं क्योंकि इससे इससे रीढ़ मजबूत होती है। अवसाद ग्रस्त होने पर हमारी इच्छा शक्ति और संकल्प हमसे दूर हो जाते हैं। इसके लिए हमें खुद को प्रेरित रखना है। छोटे-छोटे और आसान रोज करने हैं।
डिप्रेशन को समाप्त करने में उल्टे आसन जैसे पिंच मयूरासना, शीर्षासन,सेतु बंध सर्वांगासन,अधोमुख वृक्षासन, और सर्वांगासन बहुत प्रभावी हैं।
11 बनाएं अपनी विश लिस्ट :
अवसाद को दूर करने के लिए आप अपने करीब जाएँ। अपनी व्यक्तिगत विश लिस्ट बनाएं। हर वह काम जिसमें आपको आनंद आता है वो जरुर करने की कोशिश करें। यदि प्रकृति के करीब समय बिताना, खाना बनाना, लिखना, संगीत सुनना, अच्छी किताब पढ़ना, टीवी देखना, टीवी देखना जैसे काम पसंद है तो उन्हें जरुर करें। कोई और भी मनपसंद शौक है तो भी उसे पूरा करें।
12 दिमाग करें 'शट डाउन' :
बहुत ज्यादा परेशान है। अवसाद ने घेर रखा है। आस पास के स्थितियों पर क्रोध आ रहा है तो दिमाग को कुछ नहीं सूझता। सिर्फ गुस्सा आता है। ऐसे में अपने गुस्से पर नियंत्रण के लिए सबसे पहले दिमाग के शटडाउन कर दें। ठीक उसी तरह जैसे कंप्यूटर के हैंग होने पर जब कुछ नहीं समझ में आता है तो हम उसे शटडाउन कर देते हैं। दिमाग को शटडाउन करने के लिए सबकुछ सोचना बंद कर दें। कौन क्या कह रहा है, आस पास क्या हो रहा है, किस बात पर आपको गुस्सा आ रहा है इस तरह की किसी बात पर ध्यान न दें।